2025, Vol. 6, Issue 2, Part D
ग्रामीण़ कृषि साख व्यवस्था में सहकारी बैंकों के योगदान का विश्लेषणात्मक अध्ययन (पिथौरागढ जिला सहकारी बैंक के विशेष सन्द्रर्भ में)
Author(s): भुवन चन्द्र मेलकानी, मुकेश चन्द्र उपाध्याय
Abstract: भारत की लगभग 60 प्रतिशत जनसंख्या आज भी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। कृषि कार्य को संचालित करने के लिए किसान को बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई,यंत्र आदि के लिए वित्त की आवश्यकता होती है। इस आवश्यकता की पूर्ति के लिए एक संगठित और विश्वसनीय साख प्रणाली की आवश्यकता होती है। जिसे कृषि साख व्यवस्था कहते हैं। इस संदर्भ में सहकारी बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जो ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाते हैं। सहकारी बैंक किसानों को अल्प ब्याज दर पर ऋण प्रदान करते हैं। जिससे उन्हें साहूकारों के चंगुल में फँसने से मुक्ति मिलती है। जिला सहकारी बैंक उत्तराखण्ड राज्य में कार्यरत एक प्रमुख ग्रामीण बैंकिंग संस्था है। जो पर्वतीय क्षेत्र में भी किसानों तक कृषि साख की पहुँच सुनिश्चित कर रहा है।
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How to cite this article:
भुवन चन्द्र मेलकानी, मुकेश चन्द्र उपाध्याय. ग्रामीण़ कृषि साख व्यवस्था में सहकारी बैंकों के योगदान का विश्लेषणात्मक अध्ययन (पिथौरागढ जिला सहकारी बैंक के विशेष सन्द्रर्भ में). Asian J Manage Commerce 2025;6(2):353-360.




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